Ant aur arambh : (Record no. 44042)

MARC details
000 -LEADER
fixed length control field 04711nam a2200265Ia 4500
001 - CONTROL NUMBER
control field 41333
003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER
control field IN-BdCUP
005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION
control field 20230421155817.0
008 - FIXED-LENGTH DATA ELEMENTS--GENERAL INFORMATION
fixed length control field 230413s2023 000 0 hin
020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER
International Standard Book Number 9788126730957
040 ## - CATALOGING SOURCE
Language of cataloging eng
Transcribing agency IN-BdCUP
041 ## - LANGUAGE CODE
Language code of text/sound track or separate title hin
082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER
Classification number 305
Item number SON
100 ## - MAIN ENTRY--PERSONAL NAME
Personal name Soni, Madan
Relator term Editor
245 #0 - TITLE STATEMENT
Title Ant aur arambh :
Remainder of title bisvin shtabdi ke ant pr vimarsh /
Statement of responsibility, etc. Soni, Madan (Ed.) & सोनी, मदन (सं)
260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC.
Place of publication, distribution, etc. New Delhi :
Name of publisher, distributor, etc. Rajkamal Prakashan,
Date of publication, distribution, etc. 2018.
300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION
Extent 279 p. ;
Dimensions 20 cm.
520 ## - SUMMARY, ETC.
Summary, etc. कलाओं में भारतीय आधुनिकता के एक मूर्धन्य सैयद हैदर रज़ा एक अथक और अनोखे चित्रकार तो थे ही उनकी अन्य कलाओं में भी गहरी दिलचस्पी थी। विशेषत: कविता और विचार में। वे हिन्दी को अपनी मातृभाषा मानते थे और हालाँकि उनका फ्रेंच और अँग्रेज़ी का ज्ञान और उन पर अधिकार गहरा था, वे, फ्रांस में साठ वर्ष बिताने के बाद भी, हिन्दी में रमे रहे। यह आकस्मिक नहीं है कि अपने कला-जीवन के उत्तरार्द्ध में उनके सभी चित्रों के शीर्षक हिन्दी में होते थे। वे संसार के श्रेष्ठ चित्रकारों में, २०-२१वीं सदियों में, शायद अकेले हैं जिन्होंने अपने सौ से अधिक चित्रों में देवनागरी में संस्कृत, हिन्दी और उर्दू कविता में पंक्तियाँ अंकित कीं। बरसों तक मैं जब उनके साथ कुछ समय पेरिस में बिताने जाता था तो उनके इसरार पर अपने साथ नवप्रकाशित हिन्दी कविता की पुस्तकें ले जाता था : उनके पुस्तक-संग्रह में, जो अब दिल्ली स्थित रज़ा अभिलेखागार का एक हिस्सा है, हिन्दी कविता का एक बड़ा संग्रह शामिल था। रज़ा की एक चिन्ता यह भी थी कि हिन्दी में कई विषयों में अच्छी पुस्तकों की कमी है। विशेषत: कलाओं और विचार आदि को लेकर। वे चाहते थे कि हमें कुछ पहल करना चाहिये। २०१६ में साढ़े चौरानवे वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु के बाद रज़ा फाउण्डेशन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हिन्दी में कुछ नये किस्म की पुस्तकें प्रकाशित करने की पहल रज़ा पुस्तक माला के रूप में की है, जिनमें कुछ अप्राप्य पूर्व प्रकाशित पुस्तकों का पुनर्प्रकाशन भी शामिल है। उनमें गांधी, संस्कृति-चिन्तन, संवाद, भारतीय भाषाओं से विशेषत: कला-चिन्तन के हिन्दी अनुवाद, कविता आदि की पुस्तकें शामिल की जा रही हैं। 'आमुख' से
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical term or geographic name entry element Hindi literature
Topical term or geographic name entry element Ant aur arambh: bisvin shtabdi ke ant pr vimarsh
Topical term or geographic name entry element अंत और आरम्भ : बीसवी शताब्दी के अंत पर विमर्श
700 ## - ADDED ENTRY--PERSONAL NAME
Personal name सोनी, मदन
Relator term संपादक
880 ## - ALTERNATE GRAPHIC REPRESENTATION
Linkage 245
a अंत और आरम्भ :
b बीसवी शताब्दी के अंत पर विमर्श /
942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA)
Source of classification or shelving scheme Dewey Decimal Classification
Koha item type Book
Holdings
Withdrawn status Lost status Source of classification or shelving scheme Damaged status Not for loan Home library Current library Date acquired Source of acquisition Cost, normal purchase price Bill number Total checkouts Full call number Barcode Date last seen Actual Cost, replacement price Bill Date Koha item type
    Dewey Decimal Classification     Ranganathan Library Ranganathan Library 15/02/2020 Raj Kamal Prakashan 750.00 BR8114   305 SON 037825 13/04/2023 525.00 06/02/2020 Book
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